देहरादून: उत्तराखंड में ‘देवभूमि परिवार आईडी’ योजना को बड़ा कानूनी आधार मिल गया है। राज्यपाल की मंजूरी के साथ ‘देवभूमि परिवार अधिनियम 2026’ अब लागू होने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। इससे राज्य में निवास करने वाले परिवारों का एकीकृत डिजिटल डाटाबेस तैयार किया जाएगा।

इस योजना के तहत प्रदेश में 15 वर्ष या उससे अधिक समय से रह रहे नागरिकों को देवभूमि परिवार आईडी जारी की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सही पात्रों तक पहुंचाने में पारदर्शिता आएगी और निगरानी भी आसान होगी।
डिजिटल पासबुक की तरह काम करेगी आईडी
देवभूमि परिवार आईडी एक ऑनलाइन पासबुक के रूप में होगी, जिसमें परिवार से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज रहेगी। इसमें यह भी स्पष्ट होगा कि परिवार किन योजनाओं का लाभ ले चुका है और किन योजनाओं के लिए पात्र है।
दस्तावेज सत्यापन की झंझट खत्म
इस आईडी के लागू होने के बाद नागरिकों को हर योजना के लिए बार-बार दस्तावेज जमा करने या सत्यापन कराने की आवश्यकता नहीं होगी। एक बार रजिस्ट्रेशन के बाद सभी योजनाओं में इसका उपयोग किया जा सकेगा।
फर्जीवाड़े पर सख्त कार्रवाई
अधिनियम में डाटाबेस से छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ कड़े प्रावधान किए गए हैं। दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की सजा और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
महिलाओं को मिलेगा नेतृत्व
इस योजना की एक खास विशेषता यह है कि परिवार की सबसे अधिक उम्र की महिला को परिवार का मुखिया बनाया जाएगा। यदि परिवार में कोई महिला सदस्य नहीं है, तभी पुरुष को यह जिम्मेदारी दी जाएगी।
प्राधिकरण करेगा निगरानी
अधिनियम के तहत ‘देवभूमि परिवार प्राधिकरण’ का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री करेंगे। इसमें विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी सदस्य होंगे, जो योजना के क्रियान्वयन और निगरानी का कार्य संभालेंगे।
सरकार का कहना है कि इस पहल से न केवल योजनाओं का लाभ पारदर्शी ढंग से वितरित होगा, बल्कि प्रदेश के विकास की योजना बनाने में भी सटीक डेटा उपलब्ध हो सकेगा।
