पहाड़ों के प्रति प्यार दिखा, एक्टर ने नैनीताल स्कूल में कराया बेटी का एडमिशन
बॉलीवुड अभिनेता Sanjay Mishra इन दिनों नैनीताल के दौरे पर हैं, जहां उन्होंने उत्तराखंड के पहाड़ों के प्रति अपने खास लगाव को साझा किया। उन्होंने कहा कि हरे-भरे पहाड़ उनके दिल के बेहद करीब हैं और यही कारण है कि वह बार-बार यहां खिंचे चले आते हैं।

संजय मिश्रा ने कहा कि पहाड़ धरती की सुंदरता को और निखार देते हैं। फिल्म इंडस्ट्री में भी पर्वतीय क्षेत्रों का विशेष महत्व रहा है। उनका मानना है कि रोमांटिक फिल्मों में पहाड़ों का होना लगभग अनिवार्य है, यही वजह है कि नैनीताल, कश्मीर जैसे स्थान फिल्मकारों की पहली पसंद रहते हैं।
उन्होंने बताया कि उनका उत्तराखंड से जुड़ाव सिर्फ घूमने-फिरने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने यहां अपना घर भी बनाया है। साथ ही, अपनी बेटी “पल” का दाखिला नैनीताल के प्रतिष्ठित Sherwood College में 11वीं कक्षा में कराया है। उनकी योजना है कि उनकी छोटी बेटी “लम्हा” भी इसी स्कूल से पढ़ाई करे।
फिल्म शूटिंग के लिए उत्तराखंड पहली पसंद
अभिनेता ने कहा कि व्यस्तता के बावजूद वह पहाड़ों में समय बिताने का मौका निकाल ही लेते हैं। वर्तमान में वह “गोलमाल”, “धमाल” और “प्रीतम प्यारे” जैसी फिल्मों में काम कर रहे हैं, जबकि उनकी हालिया रिलीज “कर्त्तव्य” और “वध 2” को भी दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिला है। उन्होंने भविष्य में उत्तराखंड की वादियों में फिल्मों की शूटिंग करने की इच्छा जताई।
प्रकृति संरक्षण पर दिया संदेश
संजय मिश्रा ने पहाड़ों की खूबसूरती की सराहना करते हुए कहा कि इनका संरक्षण बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना समय की मांग है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस प्राकृतिक धरोहर का आनंद ले सकें।
स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मंच
उनके साथ पहुंचे अभिनेता Adil Miyan ने बताया कि संजय मिश्रा उत्तराखंड के स्थानीय युवाओं को फिल्म इंडस्ट्री में अवसर दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। जल्द ही एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई जाएगी, जिसमें स्थानीय कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा।
वार्षिकोत्सव में होंगे मुख्य अतिथि
जानकारी के अनुसार, संजय मिश्रा 2 जून को Sherwood College के वार्षिकोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उनके इस दौरे को लेकर स्थानीय लोगों और विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
नैनीताल में उनकी मौजूदगी यह दर्शाती है कि उनका उत्तराखंड से जुड़ाव केवल पेशेवर नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी बेहद मजबूत है।
