

एक नवंबर को मनाए जाने वाले विश्व वीगन दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्थानीय अनाज, दालों और हरी सब्जियों के महत्व पर जोर दिया है। उनका मानना है कि पहाड़ का पारंपरिक भोजन पोषण से भरपूर है और इसे दैनिक आहार में शामिल कर बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।
मडुआ, झंगोरा और पहाड़ी दालों में छिपा पोषण
अल्मोड़ा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से मडुआ (रागी), झंगोरा, गहत की दाल, भट्ट और स्थानीय हरी सब्जियां भोजन का अहम हिस्सा रही हैं। ये खाद्य पदार्थ प्राकृतिक रूप से पोषक तत्वों से भरपूर हैं। संतुलित आहार के रूप में इनका सेवन शरीर को फाइबर, प्रोटीन और अन्य जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करता है।
स्थानीय चिकित्सकों के अनुसार, इन पारंपरिक खाद्य पदार्थों को नियमित भोजन में शामिल करना स्वास्थ्य के लिहाज से फायदेमंद हो सकता है। वहीं, युवाओं और जागरूक नागरिकों के बीच भी वीगन और प्लांट-बेस्ड डाइट को लेकर दिलचस्पी बढ़ रही है।
मडुआ-झंगोरा की मांग में 30 से 40 फीसदी बढ़ोतरी
पारंपरिक पहाड़ी अनाज और दालों की बढ़ती उपयोगिता का असर अब बाजार में भी दिखाई देने लगा है। स्थानीय स्तर पर जैविक खेती को बढ़ावा मिलने से लोगों को मडुआ, झंगोरा और अन्य पारंपरिक उत्पाद आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं।
स्थानीय जैविक उत्पाद विक्रेता मनोज कुमार के मुताबिक, पिछले कुछ समय में मडुआ और झंगोरा की मांग में करीब 30 से 40 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। युवाओं में भी इन उत्पादों के प्रति रुझान बढ़ रहा है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और पारंपरिक खान-पान की ओर लौटने की प्रवृत्ति को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि युवा पीढ़ी यदि अपनी पारंपरिक भोजन पद्धति को अपनाए और स्थानीय अनाज, दालों व सब्जियों को रोजमर्रा के आहार में जगह दे, तो बेहतर खान-पान की आदतें विकसित की जा सकती हैं।
