नई दिल्ली। नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन (NESO) ने मंगलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपील की कि त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या के दोषियों को फांसी की सजा दी जाए। साथ ही संगठन ने उत्तराखंड में उत्तर-पूर्व के लोगों के खिलाफ नस्ली भेदभाव और अत्याचार के मामलों से निपटने के लिए कम से कम एक विशेष पुलिस स्टेशन स्थापित करने की मांग भी की।

NESO ने इस अवसर पर नस्लीय भेदभाव के खिलाफ कड़े कानून की भी मांग की। संगठन के छात्र नेता सैमुअल बी जिरवा ने ईटीवी भारत से बातचीत में कहा, “यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। देश के अलग-अलग हिस्सों में पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं। हम उम्मीद करते हैं कि केंद्र और राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से लें और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।”
जिरवा ने यह भी कहा कि NESO देशभर के अन्य छात्र संगठनों के साथ संवाद और समन्वय बढ़ाकर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाएगा।
अपने ज्ञापन में NESO ने इस घटना को बर्बर बताते हुए उत्तर-पूर्व के लोगों के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों की कड़ी निंदा की। संगठन ने कहा कि उत्तर-पूर्वी लोग देश के विभिन्न हिस्सों में लगातार असुरक्षा और उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं, जो कई बार जानलेवा साबित हुआ है।
एनईएसओ पूर्वोत्तर के आठ प्रमुख छात्र संगठनों का समूह है, जिसमें खासी स्टूडेंट्स यूनियन (KSU), ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU), नगा स्टूडेंट्स फेडरेशन (NSF), मिजो जिरलाई पावल (MZP), त्रिपुरा स्टूडेंट्स फेडरेशन (TSF), ऑल मणिपुर स्टूडेंट्स यूनियन (AMSU), गारो स्टूडेंट्स यूनियन (GSU) और ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन (AAPSU) शामिल हैं।
ज्ञापन में NESO ने कहा कि 9 दिसंबर को 24 वर्षीय त्रिपुरा छात्र एंजेल चकमा पर हमला किया गया, जिसमें उसे पीटा गया और चाकू मारा गया। एंजेल दो सप्ताह तक अस्पताल में जीवन और मौत से जूझते रहे, जबकि उनके भाई माइकल चकमा पर भी हमला हुआ।
संगठन ने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की और कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा प्रभावी कार्रवाई की जाए, ताकि देहरादून और उत्तराखंड के अन्य हिस्सों में अध्ययनरत उत्तर-पूर्वी छात्र और लोग मानसिक, सामाजिक और शारीरिक रूप से सुरक्षित महसूस कर सकें।
