

मंदिर समिति से जुड़े लोगों के मुताबिक, इतिहास में यह चौथी बार है, जब कल्प केदार मंदिर को खोजने के लिए खुदाई की जा रही है। इससे पहले वर्ष 1926 में आपदा के बाद खुदाई कर मंदिर को मलबे और मिट्टी से बाहर निकाला गया था। करीब एक शताब्दी बाद अगस्त 2025 में आई प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर इस प्राचीन मंदिर को मलबे में दफन कर दिया। अब ग्रामीण अपने संसाधनों के सहारे मंदिर को खोजने और उसके पुनरुद्धार का प्रयास कर रहे हैं।
नवरात्र के पहले दिन पूजा-अर्चना के बाद शुरू हुई खुदाई
आपदा प्रभावित धराली गांव में रविवार को नवरात्र के पहले दिन ग्रामीणों ने कल्प केदार मंदिर की तलाश के लिए अभियान शुरू किया। इससे पहले मंदिर स्थल पर विधि-विधान के साथ हवन और पूजा-अर्चना की गई। ग्रामीणों ने अपने आराध्य समेश्वर देवता की देवडोली के आदेश और सानिध्य में खुदाई शुरू करने का निर्णय लिया।
कल्प केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार के अनुसार, फिलहाल ग्रामीण अपने संसाधनों की मदद से खुदाई कर रहे हैं। मंदिर की स्थिति और उसके ऊपर जमा मलबे को देखते हुए इस कार्य में समय और अतिरिक्त प्रयास लग सकते हैं।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की ओर से भी मंदिर के जीर्णोद्धार की घोषणा की गई है। मंदिर समिति से जुड़े लोग इस संबंध में मुख्यमंत्री से मुलाकात करने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल ले जाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि मंदिर की खोज और पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक सहयोग मिल सके।
वर्ष 1803 की आपदा से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
कल्प केदार मंदिर का इतिहास धराली क्षेत्र में आई पुरानी प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ा बताया जाता है। मंदिर समिति के सदस्य संजय पंवार के अनुसार, क्षेत्र के बुजुर्गों से मिली जानकारी के मुताबिक, वर्ष 1803 में आई आपदा के दौरान बाढ़ में मंदिर बह गया था। उस समय यहां करीब 204 मंदिरों का समूह होने की बात कही जाती है।
इसके बाद वर्ष 1887 में क्षेत्र में तीन मंदिर दिखाई दिए थे। फिर वर्ष 1926 में आई आपदा के दौरान मुख्य कल्प केदार मंदिर आंशिक रूप से जमीन में दब गया, जबकि आसपास के छोटे मंदिर बह गए थे। उस समय ग्रामीणों ने खुदाई कर मुख्य मंदिर को बाहर निकाला था।
इतिहास के इन घटनाक्रमों के आधार पर मंदिर समिति का मानना है कि कल्प केदार मंदिर का अस्तित्व लंबे समय से क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा रहा है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण बार-बार प्रभावित होने के बावजूद ग्रामीणों की आस्था इस मंदिर से बनी रही।
करीब 25 फीट मलबे के नीचे दबा है प्राचीन मंदिर
अगस्त 2025 में धराली में आई विनाशकारी आपदा ने क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी। इस दौरान बड़ी मात्रा में मलबा जमा होने से कई स्थान प्रभावित हुए। इसी आपदा में प्राचीन कल्प केदार मंदिर भी मलबे के नीचे दब गया।
मंदिर समिति से जुड़े लोगों के अनुसार, मंदिर करीब 25 फीट नीचे दबा हुआ है। ऐसे में उसे खोजने के लिए खुदाई करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। ग्रामीणों ने फिलहाल उपलब्ध संसाधनों के सहारे काम शुरू किया है और उम्मीद जताई जा रही है कि खुदाई के दौरान मंदिर की संरचना तक पहुंचने में सफलता मिलेगी।
हालांकि, मंदिर की वर्तमान स्थिति, संरचना को पहुंचे नुकसान और उसे सुरक्षित रूप से बाहर निकालने की संभावनाओं का आकलन खुदाई आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
चौथी बार मंदिर की तलाश, ग्रामीणों की आस्था बनी आधार
कल्प केदार मंदिर की तलाश का यह प्रयास इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्थानीय लोगों के अनुसार इतिहास में पहले भी प्राकृतिक आपदाओं के बाद मंदिर को खोजने के लिए खुदाई करनी पड़ी है। वर्ष 1926 में मंदिर को बाहर निकालने के बाद अब लगभग सौ साल के अंतराल पर ग्रामीण एक बार फिर उसी तरह की चुनौती का सामना कर रहे हैं।
ग्रामीणों के लिए यह केवल एक प्राचीन धार्मिक संरचना को मलबे से बाहर निकालने का प्रयास नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को संरक्षित करने की पहल भी है। नवरात्र के शुभ अवसर पर खुदाई शुरू करने के पीछे धार्मिक आस्था और मंदिर के पुनरुद्धार की भावना प्रमुख रही।
स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि मंदिर को खोजने के बाद उसके जीर्णोद्धार का कार्य आगे बढ़ सकेगा। इसके लिए प्रशासनिक और तकनीकी सहयोग की आवश्यकता भी पड़ सकती है, ताकि मलबा हटाने के दौरान मंदिर की ऐतिहासिक संरचना को नुकसान न पहुंचे।
सरकार से सहयोग की उम्मीद, जीर्णोद्धार पर टिकी नजरें
कल्प केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने मंदिर के जीर्णोद्धार की घोषणा की है। अब समिति के सदस्य सरकार के सामने मंदिर की मौजूदा स्थिति और खुदाई से जुड़ी आवश्यकताओं को रखने की तैयारी कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने अपने स्तर पर काम शुरू कर दिया है, लेकिन मंदिर की गहराई में दबे होने की जानकारी को देखते हुए आगे चलकर विशेषज्ञों और प्रशासन की मदद महत्वपूर्ण हो सकती है। मंदिर की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए उसे बाहर निकालना और पुनर्स्थापित करना इस अभियान की प्रमुख चुनौती होगी।
धराली आपदा के बाद क्षेत्र में सामान्य जनजीवन और धार्मिक विरासत को फिर से संवारने के प्रयास जारी हैं। ऐसे में कल्प केदार मंदिर की खोज ग्रामीणों के लिए उम्मीद और पुनर्निर्माण का प्रतीक बनकर सामने आई है।
करीब 14 महीने बाद शुरू हुई खुदाई ने कल्प केदार मंदिर के पुनरुद्धार की उम्मीदों को फिर से जीवित कर दिया है। अब ग्रामीणों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मलबे के नीचे दबे प्राचीन मंदिर को कब तक खोजा जा सकेगा और उसके जीर्णोद्धार की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी।
