उत्तराखंड में सर्दी का तीखा प्रहार: गंगोत्री में बिना बर्फबारी जमी नदियां, केदारनाथ बर्फ से ढका, तराई में कोहरा
उत्तरकाशी। जनवरी माह चल रहा है, लेकिन गंगोत्री धाम में इस सर्दी के मौसम में अब तक बर्फबारी दर्ज नहीं हुई है। इसके बावजूद भीषण ठंड ने हालात बेहद कठिन बना दिए हैं। तापमान माइनस शून्य से गिरकर माइनस 11 से 12 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिसके चलते गंगोत्री धाम और गोमुख ट्रैक क्षेत्र की सभी छोटी-बड़ी नदियां और नाले पूरी तरह जम चुके हैं। नदियों पर पाले की मोटी परत जमने से भागीरथी नदी में भी पानी का बहाव बेहद कम रह गया है।

गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के कनखू बैरियर इंचार्ज राजवीर रावत ने बताया कि इस सीजन में बर्फबारी न होने के बावजूद अत्यधिक ठंड के कारण केदार गंगा, ऋषिकुर नाला, पागल नाला और चीड़बासा नाला सहित गोमुख ट्रैक के सभी जल स्रोत पूरी तरह जम गए हैं। धाम में पेयजल लाइनों में पानी जमने से आपूर्ति बाधित हो रही है, जिसे पाले को आग में पिघलाकर किसी तरह बहाल किया जा रहा है।
वर्तमान में गंगोत्री धाम में करीब 25 साधु-संत साधना में लीन हैं। इसके अलावा गंगोत्री नेशनल पार्क के छह कर्मचारी, पुलिस के दो जवान और मंदिर समिति के कर्मचारी भी तैनात हैं। लगातार बढ़ रही शीतलहर और अत्यधिक ठंड के कारण यहां ड्यूटी करना बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया है।
बर्फबारी और बारिश न होने से सेब बागवानों समेत अन्य काश्तकारों की चिंता गहरा गई है। लंबे समय से सूखे हालात बने रहने के कारण सेब के बागानों के साथ-साथ मटर और गेहूं जैसी फसलों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है, जिससे किसान निराश नजर आ रहे हैं।
केदारनाथ में बर्फबारी से बढ़ी दुश्वारियां
दूसरी ओर, केदारनाथ धाम में बीते दिनों हुई भारी बर्फबारी से पूरा क्षेत्र बर्फ की सफेद चादर में ढक गया है। दो जनवरी को हुई बर्फबारी के बाद धाम में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, जिससे पुनर्निर्माण कार्य प्रभावित हुए हैं। फिलहाल केदारनाथ धाम में करीब 90 मजदूर पुनर्निर्माण कार्यों में लगे हुए हैं, लेकिन बर्फबारी और तेज ठंडी हवाएं उनकी परेशानियां बढ़ा रही हैं।
तराई में कोहरा और शीतलहर का असर
उधम सिंह नगर जिले के खटीमा तहसील क्षेत्र में घना कोहरा और शीतलहर आम जनजीवन पर असर डाल रही है। धूप न निकलने से तापमान 6 से 7 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं। कोहरे के कारण दृश्यता काफी कम हो गई है, जिससे सड़कों पर वाहन धीमी गति से चलते दिखाई दे रहे हैं और यातायात प्रभावित हो रहा है।
