
छह महीने में पालतू कुत्तों के काटने के 3,068 मामले
अप्रैल से सितंबर तक दर्ज आंकड़ों पर नजर डालें तो पालतू कुत्तों के काटने के मामले हर महीने अधिक रहे। अप्रैल में पालतू कुत्तों के काटने के 687 मामले सामने आए, जो छह महीने की अवधि में सबसे अधिक हैं। इसके बाद मई में 538, जून में 575 और जुलाई में 469 मामले दर्ज किए गए।
अगस्त में पालतू कुत्तों के काटने के 404 मामले सामने आए, जबकि सितंबर में यह संख्या 395 रही। दूसरी ओर, स्ट्रीट डॉग के काटने के मामले अप्रैल में 276, मई में 356, जून में 347, जुलाई में 368, अगस्त में 332 और सितंबर में 303 दर्ज किए गए।
आंकड़ों के अनुसार, पालतू कुत्तों के काटने के मामले प्रत्येक महीने स्ट्रीट डॉग से जुड़े मामलों से अधिक रहे। हालांकि, ये आंकड़े अस्पताल में दर्ज मामलों पर आधारित हैं और शहर में कुत्तों की कुल आबादी या सभी घटनाओं का पूरा प्रतिनिधित्व जरूरी नहीं करते।
महीनेवार डॉग बाइट के आंकड़े
| महीना | पालतू कुत्ते | स्ट्रीट डॉग |
|---|---|---|
| अप्रैल | 687 | 276 |
| मई | 538 | 356 |
| जून | 575 | 347 |
| जुलाई | 469 | 368 |
| अगस्त | 404 | 332 |
| सितंबर | 395 | 303 |
| कुल | 3,068 | 1,982 |
नोट: उपलब्ध महीनेवार आंकड़ों के अनुसार, पालतू और स्ट्रीट डॉग के इन दोनों वर्गों का कुल योग 5,050 है, जबकि खबर में छह महीने के कुल डॉग बाइट मामले 6,817 बताए गए हैं। शेष 1,767 मामलों का वर्गीकरण उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।
डर, दर्द और तनाव से बदल सकता है कुत्तों का व्यवहार
पशु चिकित्सकों के मुताबिक, पालतू कुत्तों का आक्रामक व्यवहार कई कारणों से सामने आ सकता है। डर, दर्द, तनाव, बीमारी या भोजन के दौरान असुरक्षा महसूस होने पर कुत्ता काटने की कोशिश कर सकता है। कई बार कुत्ते के व्यवहार में अचानक बदलाव भी दिखाई देता है, जिसे समय रहते समझना जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कुत्तों के प्रजनन काल के दौरान हार्मोनल बदलाव भी उनके व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं। इस अवधि में कुछ कुत्ते अधिक चिड़चिड़े या आक्रामक हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में पालतू कुत्तों के व्यवहार पर नजर रखना और उनके साथ सावधानी बरतना आवश्यक है।
हालांकि, हर कुत्ते का व्यवहार अलग होता है और केवल प्रजनन काल को आक्रामकता का एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता। कुत्ते को अचानक दर्द होना, किसी खतरे का एहसास होना या असहज परिस्थिति में घिर जाना भी काटने की वजह बन सकता है।
नियमित टीकाकरण और निगरानी जरूरी
वरिष्ठ पशुचिकित्साधिकारी डॉ. आरके पाठक के मुताबिक, कुत्तों के व्यवहार में बदलाव के पीछे कई कारण हो सकते हैं। प्रजनन काल के दौरान हार्मोन में बदलाव के कारण भी कुछ कुत्ते आक्रामक हो जाते हैं। ऐसे में पालतू कुत्तों का नियमित टीकाकरण और उनकी निगरानी बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पालतू कुत्तों को रखने वाले लोगों को उनके व्यवहार पर लगातार ध्यान देना चाहिए। यदि कुत्ता अचानक आक्रामक हो जाए, बार-बार गुर्राने लगे या सामान्य व्यवहार से अलग प्रतिक्रिया देने लगे, तो पशु चिकित्सक से सलाह लेना उचित है। बच्चों को भी कुत्तों के साथ खेलते समय सावधानी बरतने और उन्हें परेशान न करने की सीख दी जानी चाहिए।
पालतू कुत्तों को लेकर भी सतर्कता जरूरी
हल्द्वानी में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि कुत्तों के काटने की समस्या से निपटने के लिए केवल स्ट्रीट डॉग पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। पालतू कुत्तों की जिम्मेदार देखभाल, नियमित टीकाकरण, उचित प्रशिक्षण और सार्वजनिक स्थानों पर नियंत्रण भी महत्वपूर्ण है।
यदि कुत्ता किसी व्यक्ति को काट ले, तो घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए और बिना देरी किए चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार रेबीज से बचाव के टीके और अन्य जरूरी उपचार कराना आवश्यक है।
कुल मिलाकर, अप्रैल से सितंबर के बीच सामने आए आंकड़ों ने हल्द्वानी में डॉग बाइट की समस्या के एक महत्वपूर्ण पहलू को उजागर किया है। पालतू कुत्तों से जुड़े मामलों की अधिक संख्या यह सवाल खड़ा करती है कि कुत्तों के व्यवहार को समझने, उनकी उचित देखभाल सुनिश्चित करने और लोगों को जागरूक करने के लिए और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
