आठ महीने पहले बना प्राधिकरण, अब तक सिर्फ दो संस्थानों ने ली मान्यता
मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता से जुड़े मामलों के लिए सरकार ने करीब आठ महीने पहले राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया था। हालांकि, मदरसों को छोड़कर अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान प्राधिकरण से मान्यता लेने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में अब तक केवल दो गैर-मदरसा अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों ने प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त की है। इस स्थिति ने संस्थानों की पात्रता और अल्पसंख्यक दर्जे के आधार पर मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रदेश में 91 अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान
- 452 मदरसे प्रदेश में संचालित हैं।
- 91 अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान हैं।
- इनमें 27 संस्थान माध्यमिक स्तर के हैं।
- 64 संस्थान बेसिक स्तर के हैं।
- अब तक 35 मदरसों और दो अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों ने प्राधिकरण से मान्यता ली है।
85 फीसदी अल्पसंख्यक छात्रों की शर्त पर बढ़ी चर्चा
नियमानुसार, अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा हासिल करने के लिए निर्धारित मानकों का पालन करना जरूरी है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, जिन संस्थानों में 85 फीसदी अल्पसंख्यक छात्र पंजीकृत नहीं हैं, उनकी पात्रता और अल्पसंख्यक दर्जे के आधार पर मिलने वाली छूट की वैधता की जांच अहम हो जाती है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करने वाले संस्थानों को अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के तौर पर किस आधार पर सुविधाएं और छूट मिल रही हैं। मान्यता के नवीनीकरण के लिए तय की गई शर्त के बाद इस मुद्दे पर निगरानी और पात्रता की जांच को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
फिलहाल, इन संस्थानों के अल्पसंख्यक दर्जे की वैधता और उन्हें मिल रही सुविधाओं पर किसी व्यापक जांच या कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
