सोशल मीडिया पर भ्रामक और आपत्तिजनक वीडियो पुलिस के लिए चुनौती, गलत कंटेंट शेयर करने पर होगी कार्रवाई: एसएसपी
देहरादून: सोशल मीडिया की बढ़ती पहुंच के साथ ही यहां वायरल होने वाले वीडियो की सच्चाई जांचना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। कोई भी वीडियो कुछ ही समय में हजारों लोगों तक पहुंच जाती है और उसके बाद पुलिस को उसकी सत्यता की जांच शुरू करनी पड़ती है। ऐसे में बिना पुष्टि किए किसी भी वीडियो को लाइक या शेयर करना आम लोगों के लिए भी कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है।

इन दिनों सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर धमकी देना, आत्महत्या की चेतावनी देना या निजी दुश्मनी निकालना आम होता जा रहा है। इसके अलावा हथियारों के साथ वीडियो, खतरनाक स्टंट और नियमों के खिलाफ गतिविधियों को पोस्ट कर युवा लाइक और व्यूज बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे मामलों में वीडियो में दिख रहे लोगों की पहचान और उसकी वास्तविकता तक पहुंचना पुलिस के लिए कठिन हो जाता है।
पुलिस का कहना है कि आधुनिक तकनीक के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू हैं। एक ओर सोशल मीडिया सूचनाओं के त्वरित प्रसार का माध्यम है, तो दूसरी ओर बिना किसी विश्वसनीय स्रोत के गलत और भ्रामक खबरें तेजी से फैल जाती हैं। अक्सर देखा जाता है कि गलत सूचनाएं ज्यादा तेजी से शेयर की जाती हैं, जिससे बाद में लोगों को इसका नुकसान उठाना पड़ता है।
देहरादून के एसएसपी अजय सिंह ने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर किसी भी पोस्ट को आगे बढ़ाने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति गलत या भ्रामक पोस्ट को फॉरवर्ड करता है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। कई मामलों में इस तरह की पोस्ट को लेकर मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।
एसएसपी ने बताया कि रोजाना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सैकड़ों की संख्या में अलग-अलग तरह की पोस्ट सामने आती हैं। किसी गलत वीडियो के वायरल होने के बाद सबसे बड़ा खतरा उसके तेजी से फैलने का होता है, क्योंकि नकारात्मक कंटेंट अधिक तेजी से शेयर किया जाता है। ऐसे में वीडियो को हटवाना भी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए दून पुलिस ने सोशल मीडिया मॉनिटरिंग को और मजबूत किया है। सभी थानों और संबंधित विभागों के साथ मिलकर सोशल मीडिया पर नजर रखी जा रही है। अनजाने में गलत पोस्ट करने वालों को पुलिस द्वारा काउंसिलिंग कर जागरूक किया जाता है, जबकि जानबूझकर भ्रामक और आपत्तिजनक पोस्ट फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
