काशीपुर: किसान विकास क्लब (उत्तराखंड) की मासिक बैठक शनिवार को अनाज मंडी काशीपुर स्थित गेस्ट हाउस में आयोजित की गई। बैठक में मुरादाबाद–काशीपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-734) के निर्माण कार्य में मिट्टी के स्थान पर फैक्टरियों से निकलने वाले केमिकल युक्त अपशिष्ट और काली राख के उपयोग पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि इस पर जल्द रोक नहीं लगाई गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

बैठक की अध्यक्षता क्लब के प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार शर्मा ने की। बैठक की शुरुआत खालसा पंथ के संस्थापक गुरु गोबिंद सिंह की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। अरुण कुमार शर्मा ने कहा कि एनएच-734 के भरान में औद्योगिक केमिकल युक्त कचरे का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो कृषि भूमि, फसलों और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
किसानों ने आशंका जताई कि बारिश के दौरान यह केमिकल युक्त सामग्री बहकर खेतों में जाएगी, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होगी और फसलों पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। किसानों का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर वे कई बार मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
किसान विकास क्लब ने स्पष्ट किया कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे। बैठक में उपाध्यक्ष सरदार अर्जुन सिंह, सचिव श्वेतांशु चतुर्वेदी, टीका सिंह सैनी, रवि कुमार, भीम सिंह, डॉ. अशोक अरोरा, देवी सिंह यादव, चौधरी सतपाल सिंह, रवि साहनी समेत कई किसान प्रतिनिधि मौजूद रहे।
इनसेट — हाई वोल्टेज लाइन हटाने की मांग
बैठक के दौरान किसानों ने खेतों से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइनों का मुद्दा भी उठाया। किसानों का कहना है कि करीब 50–60 वर्षों से मौजूद ये लाइनें आज भी जान-माल के लिए खतरा बनी हुई हैं और कई बार फसलों में आग लगने की घटनाएं होती हैं। किसानों ने मांग की कि इन बिजली लाइनों को खेतों से हटाकर सड़कों के किनारे शिफ्ट किया जाए।
