झारग्राम की धरती बुधवार को उस वक्त गरज उठी जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंच से बीजेपी को खुली चुनौती दे डाली। उन्होंने कहा,
“मुझे तब तक कोई नहीं हरा सकता, जब तक मैं खुद न चाहूं। ममता बनर्जी को हराना इतना आसान नहीं!”

मुख्यमंत्री ने अपनी बातों में साफ इशारा दिया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए बंगाल की राह आसान नहीं होने वाली।
“मुझे मत छेड़ो… वरना मैं खतरनाक हो जाऊंगी”
भावुक लहजे में अपने पुराने संघर्षों को याद करते हुए उन्होंने कहा,
“मेरा सिर फोड़ा गया, शरीर खून से सना था। फिर भी मैं डरी नहीं। मैं जिंदा शेरनी हूं… मुझे घायल करने की कोशिश मत करना।”
यह बयान न केवल विरोधियों के लिए चेतावनी था, बल्कि समर्थकों के लिए एक जोशीला संदेश भी।
EC पर भड़कीं ममता: “अमित शाह की कठपुतली है आयोग”
चुनाव आयोग द्वारा राज्य के चार अधिकारियों को निलंबित किए जाने पर ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग निष्पक्ष नहीं, बल्कि
“अमित शाह के इशारों पर नाच रहा है।”
मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा,
“अगर हिम्मत है तो मेरे अफसरों पर कार्रवाई करके दिखाओ।”
जनता को चेतावनी: “आपका वोटर कार्ड ही आपकी पहचान है”
ममता ने बंगालवासियों से सतर्क रहने की अपील की और कहा,
“मतदाता सूची में नाम जरूर जांचें, क्योंकि यही आपकी पहचान है। चुनाव के दिन पछताना नहीं पड़े।”
“बांग्ला बोलोगे तो बांग्लादेशी कहोगे?” — ममता का सवाल
एनआरसी और भाषायी भेदभाव पर भी ममता ने गुस्सा ज़ाहिर किया। उन्होंने कहा,
“अब अगर कोई बांग्ला बोलता है, तो उसे बांग्लादेशी या रोहिंग्या कहा जा रहा है। ये हमारी भाषा और संस्कृति का अपमान है।”
उन्होंने ‘जय बांग्ला’ का नारा देकर जनता से प्रतिरोध का आह्वान किया।
राज्यकर्मियों को दिलाया भरोसा
राज्य सरकार के कर्मचारियों को सीधा संदेश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:
“आप जनता के सेवक हैं, डरिए मत। आपकी सुरक्षा मेरी जिम्मेदारी है। कोई आपका शोषण नहीं कर सकता।”
BJP का पलटवार: “ममता की जुबान उनके डर को दिखाती है”
भाजपा नेता राहुल सिन्हा ने ममता के भाषण को डर और असुरक्षा से भरा बताया। उन्होंने कहा,
“जो नेता विरोधियों को चींटी समझने लगे, वो खुद ही अंदर से कमजोर हो चुका होता है।”
