काशीपुर: उत्तराखंड के काशीपुर स्थित ऐतिहासिक गोविषाण टीले में 22 साल बाद शुरू हुआ पुरातात्विक उत्खनन फिलहाल मानसून की बारिश के चलते रोक दिया गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) देहरादून की टीम ने 16 जुलाई से 4 अगस्त तक यहां खुदाई की। इस दौरान करीब 10 फीट की गहराई पर कुछ निर्माण अवशेष सामने आए हैं।

लगातार बारिश के कारण उत्खनन क्षेत्र में काम प्रभावित होने लगा, जिसके बाद विभाग ने फिलहाल खुदाई रोकने का फैसला लिया। अब मौसम साफ होने के बाद सितंबर के मध्य से उत्खनन दोबारा शुरू किए जाने की तैयारी है।
खुदाई वाले हिस्से को किया गया सुरक्षित
बारिश से पुरातात्विक अवशेषों को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए एएसआई की टीम ने अब तक खोदे गए हिस्से को मजबूत तिरपाल और पन्नी से ढक दिया है। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मौसम सामान्य होने के बाद इसी स्थान से आगे की खुदाई शुरू की जाएगी।
संरक्षक सहायक, पुरातत्व विभाग दिनेश शर्मा ने बताया कि 16 जुलाई से 4 अगस्त तक उत्खनन कराया गया था। मानसून की बारिश के कारण काम में लगातार बाधा आने लगी, जिसके चलते फिलहाल उत्खनन रोक दिया गया है।
10 फीट गहराई में मिले निर्माण के संकेत
अब तक की खुदाई के दौरान करीब 10 फीट नीचे कुछ निर्माण अवशेष मिले हैं। इन अवशेषों की वास्तविक प्रकृति और ऐतिहासिक महत्व को लेकर आगे विशेषज्ञ जांच की जाएगी। विभाग को उम्मीद है कि उत्खनन के अगले चरण में इस क्षेत्र से और महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आ सकते हैं।
22 साल बाद फिर शुरू हुआ था पुरातात्विक अभियान
बाजपुर रोड पर स्थित गोविषाण टीला लंबे समय से इतिहास और पुरातत्व के लिहाज से महत्वपूर्ण स्थल रहा है। करीब 22 साल के अंतराल के बाद एएसआई देहरादून की टीम ने 16 जुलाई को यहां दोबारा उत्खनन शुरू किया था।
कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने मौके पर पहुंचकर विधिवत उत्खनन कार्य का शुभारंभ किया था। इसके बाद टीम ने स्थल पर खुदाई कर अलग-अलग कालखंडों से जुड़े अवशेषों की तलाश शुरू की।
ह्वेनसांग के यात्रा वृत्तांत में भी गोविषाण का जिक्र
गोविषाण टीला उधम सिंह नगर जिले में काशीपुर के पास स्थित एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, राजा हर्षवर्धन के काल में इस स्थान को ‘गोविषाण’ के नाम से जाना जाता था। सातवीं शताब्दी में भारत आए चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपने यात्रा वृत्तांत में इस क्षेत्र का उल्लेख किया था।
इस स्थल पर पहले हुई खुदाई में लेट वैदिक काल, कुषाण काल और गुप्तकाल से जुड़े अवशेष मिलने की जानकारी सामने आई है। यहां से प्राचीन सिक्के, मूर्तियां, मिट्टी के बर्तन और किले के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं।
सितंबर में फिर शुरू होगा उत्खनन
पुरातत्व विभाग अब मौसम सामान्य होने का इंतजार कर रहा है। सितंबर के मध्य में बारिश थमने के बाद उत्खनन का अगला चरण शुरू होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि आगे की खुदाई में गोविषाण टीले के इतिहास और यहां विकसित हुई प्राचीन सभ्यताओं से जुड़े कौन-कौन से नए साक्ष्य सामने आते हैं।
