देहरादून: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तराखंड में बेसिक और जूनियर हाईस्कूल के 18,000 से अधिक शिक्षकों की पदोन्नतियां रोक दी गई हैं। कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य करते हुए कहा है कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि में पांच साल से अधिक समय बचा है, उन्हें दो साल के भीतर टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।

राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का निर्णय लिया है। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारियों ने शिक्षकों की पदोन्नति संबंधी स्पष्ट दिशा-निर्देश के लिए शिक्षा निदेशालय से संपर्क किया। शिक्षा निदेशालय ने सभी जिलों को निर्देश दिया कि शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश और राज्य सरकार के निर्णय से अवगत कराया जाए।
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल ने बताया कि चमोली, टिहरी गढ़वाल और चंपावत के जिला शिक्षा अधिकारियों ने पत्रों के माध्यम से दिशा-निर्देश मांगे हैं। कुछ जिलों में शिक्षक पदोन्नति के लिए धरना और प्रदर्शन भी कर रहे हैं।
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद थापा ने कहा कि 2010-11 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी और पदोन्नति का नियम लागू नहीं होना चाहिए, क्योंकि उस समय टीईटी लागू नहीं था और उनकी नियुक्ति वैध रूप से हुई थी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से अंतिम फैसला आने तक पदोन्नति को रोकना उचित नहीं है।
