नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के सिग्नल एवं टेलीकम्युनिकेशन (S&T) कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। इसी क्रम में 24 जून को पूरे देश में ‘डिमांड डे’ मनाकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

यूनियन का कहना है कि लंबे समय से उठाई जा रही समस्याओं पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिसके चलते कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका आरोप है कि कठिन और जोखिम भरे हालात में काम करने के बावजूद उन्हें पर्याप्त सुरक्षा और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
ड्यूटी के दौरान हादसे और बढ़ता दबाव
कर्मचारियों के अनुसार, हर साल लेवल क्रॉसिंग गेट की मरम्मत के दौरान कई S&T कर्मचारी हादसों का शिकार हो जाते हैं। इसके अलावा सिग्नल फेल होने पर उन्हें बिना तय ड्यूटी रोस्टर और निर्धारित समय के बाहर भी काम पर बुलाया जाता है, जिससे कार्य-घंटों के नियमों का उल्लंघन होता है।
प्रशासन पर अनदेखी के आरोप
इंडियन रेलवे सिग्नल एंड टेलीकॉम मेंटेनर्स यूनियन (IRSTMU) का कहना है कि उन्होंने कई बार रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड को ज्ञापन सौंपे, लेकिन उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
यूनियन के नेताओं के मुताबिक, यह विरोध प्रदर्शन कर्मचारियों की मजबूरी है, क्योंकि उनकी समस्याएं लगातार नजरअंदाज की जा रही हैं।
5 नवंबर को टूल डाउन की चेतावनी
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो 5 नवंबर को दो घंटे के लिए ‘टूल डाउन’ आंदोलन किया जाएगा, जिसके तहत कर्मचारी काम बंद कर देंगे।
स्वास्थ्य और कार्य-जीवन संतुलन पर असर
अनियमित ड्यूटी और बढ़ते कार्यभार के कारण कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। कई कर्मचारी तनाव, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
रिस्क अलाउंस पर अब भी इंतजार
यूनियन का कहना है कि जोखिम और कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ‘रिस्क और हार्डशिप अलाउंस’ पर बनी समिति अपनी रिपोर्ट दे चुकी है, लेकिन अंतिम निर्णय अब तक लंबित है।
कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि वे टकराव नहीं चाहते, बल्कि अपनी मांगों का समाधान चाहते हैं। हालांकि, यदि स्थिति नहीं बदली तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
