नैनीताल/किच्छा। किच्छा नगर पालिका से अलग गठित की गई सिरौलीकलां नगर पालिका के चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष एवं सभासद पदों के लिए निर्धारित तिथि पर मतदान कराया जाएगा, लेकिन फिलहाल मतगणना और चुनाव परिणामों की घोषणा पर रोक रहेगी।

जानकारी के अनुसार सिरौलीकलां नगर पालिका के गठन को लेकर दायर याचिका वर्तमान में हाई कोर्ट में विचाराधीन है। इसी मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई है। न्यायालय के समक्ष हुई कार्यवाही के बाद मतदान प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति दी गई है, जबकि मतगणना और परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया को अगली सुनवाई तक स्थगित रखा गया है।
सूत्रों के मुताबिक मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित है। बताया जा रहा है कि न्यायालय के अंतिम निर्णय के बाद ही मतगणना और परिणामों की घोषणा को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में मतदान के बाद मतपेटियों में बंद जनादेश फिलहाल सार्वजनिक नहीं हो सकेगा।
निर्वाचन आयोग के इस फैसले का असर चुनाव मैदान में उतरे सभी प्रत्याशियों और उनके समर्थकों पर पड़ा है। कई दिनों से चल रहे चुनाव प्रचार के बाद उम्मीदवारों को मतदान के तुरंत बाद परिणाम मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अब उन्हें न्यायालय के फैसले का इंतजार करना होगा। इससे राजनीतिक हलकों में चर्चा और उत्सुकता दोनों बढ़ गई हैं।
वहीं प्रशासन ने निर्धारित तिथि पर मतदान संपन्न कराने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। किच्छा और सिरौलीकलां दोनों क्षेत्रों में मतदान केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं तथा निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।
गौरतलब है कि राज्य निर्वाचन आयोग पहले ही दोनों नगर पालिका परिषदों के अध्यक्ष और सदस्य पदों के चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर चुका है। ऐसे में मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, लेकिन चुनावी नतीजों की तस्वीर हाई कोर्ट के आगामी निर्णय के बाद ही साफ हो पाएगी।
5 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी सबकी नजर
किच्छा और सिरौलीकलां के मतदाता मतदान के माध्यम से अपने प्रतिनिधियों का चयन करेंगे, लेकिन उनके फैसले का आधिकारिक परिणाम कब सामने आएगा, यह हाई कोर्ट में लंबित मामले के निस्तारण पर निर्भर करेगा। फिलहाल प्रत्याशियों, राजनीतिक दलों और मतदाताओं की निगाहें 5 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
