देहरादून: क्रिप्टोकरेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर देहरादून में करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। मुजफ्फरनगर निवासी लविश चौधरी उर्फ नवाब पर 100 से अधिक लोगों को 6 से 7 प्रतिशत तक मुनाफे का लालच देकर निवेश कराने और बाद में रकम की निकासी रोकने का आरोप है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड एसटीएफ ने जांच अपने हाथ में ले ली है।
कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश का दावा
नकरौंदा निवासी कविता परमार की ओर से न्यायालय में दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, लविश चौधरी ने कथित तौर पर कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया। इनमें ‘बाट ब्रो’, ‘यार्कर’, ‘यार्कर कैपिटल’, ‘बाट अल्फा’, ‘क्रास मार्केट’, ‘टीएलसी काइन’ और ‘माइन क्रिप्टो’ के नाम बताए गए हैं।
आरोप है कि सोशल मीडिया, वेबसाइट और प्रचार बैठकों के जरिए निवेशकों को क्रिप्टोकरेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग में हर महीने 5 से 6 प्रतिशत तक रिटर्न का भरोसा दिलाया गया।
WhatsApp ग्रुप के जरिए निवेशकों से संपर्क
शिकायत के मुताबिक, करीब तीन साल पहले आरोपी ने अलग-अलग माध्यमों से लोगों से संपर्क किया। WhatsApp ग्रुप, वेबसाइट और प्रचार बैठकों के जरिए निवेश योजना की जानकारी देकर लोगों को रकम लगाने के लिए प्रेरित किया गया।
आरोप है कि शुरुआत में कुछ निवेशकों को रिटर्न दिया गया, जिससे योजना के प्रति उनका भरोसा बढ़ा। इसके बाद उन्हें अधिक रकम निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
अक्टूबर से बंद हुई रकम की निकासी
शिकायतकर्ता के अनुसार, बड़ी संख्या में लोगों से रकम जुटाने के बाद अक्टूबर से निवेश की रकम निकालने की सुविधा बंद कर दी गई। इसके बाद निवेशकों को अपना पैसा वापस नहीं मिला और आरोपी से संपर्क करना भी मुश्किल हो गया।
शिकायत में दावा किया गया है कि देहरादून क्षेत्र में 100 से 120 से अधिक लोग प्रभावित हो सकते हैं। इस मामले में कथित धोखाधड़ी की रकम करीब 8 करोड़ रुपये बताई गई है।
कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुआ मुकदमा
कविता परमार ने 29 मई को रायपुर थाने में शिकायत देने की बात कही है। आरोप है कि शिकायत के बावजूद तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं हुआ, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली।
न्यायालय के आदेश के बाद रायपुर थाना पुलिस ने लविश चौधरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर जांच उत्तराखंड एसटीएफ को सौंप दी गई।
25 करोड़ और 12 करोड़ की कथित धोखाधड़ी के मामले भी सामने आए
कथित निवेश घोटाले से जुड़े अन्य मामलों में भी करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के आरोप सामने आ चुके हैं। एक मामले में करीब 25 करोड़ रुपये, जबकि हालिया मामले में 12 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है।
जांच आगे बढ़ने के साथ अन्य निवेशकों के भी सामने आने की संभावना है। ऐसे में कथित ठगी की कुल रकम और प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ सकती है।
बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की होगी पड़ताल
एसटीएफ अब मामले से जुड़े बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबरों, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और निवेशकों की जानकारी खंगालेगी। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि निवेशकों से जुटाई गई रकम कहां ट्रांसफर हुई और कथित नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।
फिलहाल लविश चौधरी पर लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। कथित ठगी की वास्तविक रकम, पीड़ितों की संख्या और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
